नीमच, 30 जुलाई। जिले में मिलावटी एवं अमानक खाद्य पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने बिना वैध खाद्य लाइसेंस के संचालित मिल्क प्लांट के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने प्लांट संचालक एवं प्रभारी के खिलाफ अपर कलेक्टर (एडीएम) न्यायालय में प्रकरण दर्ज कराया है। अधिनियम के तहत दोष सिद्ध होने पर अधिकतम 10 लाख रुपये तक के अर्थदंड का प्रावधान है।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा 22 जुलाई को ग्राम दुधलाई (तहसील रामपुरा) स्थित एम/एस श्री सांवरिया मिल्क प्लांट का निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान 5 हजार लीटर क्षमता की बल्क मिल्क कूलर (बीएमसी) में करीब 4 हजार लीटर दूध का संग्रहण एवं विक्रय किया जा रहा था। निरीक्षण के समय प्लांट प्रबंधन वैध खाद्य लाइसेंस प्रस्तुत नहीं कर सका और केवल परिवहन संबंधी खाद्य पंजीयन ही उपलब्ध कराया गया।
जांच में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की विभिन्न धाराओं के उल्लंघन पाए जाने पर प्लांट प्रभारी कमलेश कुमार जाट एवं संचालक दिनेश कुमार जाट के विरुद्ध 28 जुलाई को एडीएम न्यायालय, नीमच में प्रकरण दर्ज किया गया।
इसी अभियान के तहत 29 जुलाई को रावण रूंडी स्थित श्री जोगमाया सेल्स का भी आकस्मिक निरीक्षण किया गया। यहां मानव उपभोग के लिए विक्रय किए जा रहे प्रभु श्री घी एवं डीएफ गोल्ड घी के नमूने गुणवत्ता परीक्षण के लिए राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजे गए हैं। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजू सोलंकी , यशवंत कुमार शर्मा एवं उनकी टीम ने की। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में मिलावटी एवं अमानक खाद्य पदार्थों के विरुद्ध विशेष जांच और सैंपलिंग अभियान लगातार जारी रहेगा।